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वनराज की शान और शौकत पन्ना नेशनल पार्क

  • Writer: Deep Tiwari
    Deep Tiwari
  • Aug 22, 2016
  • 4 min read

Updated: Oct 20, 2020

बाघ देखू पर्यटकों के पन्ना नेशनल पार्क सबसे अच्छी जगह है मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में फैला यह नेशनल पार्क 5 साल पहले उस समय काफी चर्चा में रहा जब यह बाघ विहीन हो गया था. पर लोगों की जागरुकता और प्रशासन के संयोग से आज जंगल फिर अपने राजा की दहाड़ से गूंजने लगा है 543 स्केवर किमी. में फैले इस पार्क में इस समय यहां 32 से भी ज्यादा वनराज शान से चहलकदमी करते दिखाई देंगे.

नेशनल पार्क

1980 के पहले इसे वाइल्ड लाइफ सेन्च्यूरी घोषित किया गया था. सन 1981 में इसे नेशनल पार्क का दर्जा दिया. इस जगह गर्मियों का मौसम बहुत अधिक गर्म और सर्दियों का मौसम बहुत ठंडा होता है क्यों कि यहां की जलवायु उष्ण कटिबंधीय है.पन्ना नेशनल पार्क आने के लिए नवबंर से अप्रेल माह के बीच का समय उपयुक्त होता है. यहां के पार्क में आपको टाईगर के अलावा चौसिंगा हिरण, चिंकारा, सांभर, जंगली बिल्ली, घड़ियाल, मगरमच्छ, नीलगाय भी मिल जाएगी. सबसे नजदीक यहां से खजुराहो है जहां रेल मार्ग और हवाई मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है,अब तो रेल्वे ने भी अपनी लक्जरी ट्रैन महाराजा का रूट खजुराहो से होकर वाराणसी कर दिया है. खजुराहो से 30 मिनिट में पन्ना नेशनल पार्क पहुंचा जा सकता है.

क्या है खास

केन नदी के किनारे का सुरम्य वातावरण और पेड़ के ऊपर बने मचाननुमा रेस्टोरेंट में बैठकर पहाड़ियों के पीछे डूबते सूरज का मनोरम द्वश्य को देखकर गर्मागरम कौफी के घूंट का अहसास आपको किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाता है. पन्ना नेशनल पार्क के समीप लेशनल पार्क के मंडला गेट से थोड़ी ही दूरी पर स्थित केन नदी के मुहाने पर बना केन रिवर लौज enquiry@pugdundeesafaris.com ऐसी ही शाही मेहमाननवाजी के लिए जाना जाता है. लौज के औनर श्यामेंद्र सिंह (बिन्नी राजा) बताते हैं कि हमारा केन रिवर लौज सबसे पुराना है यहां यह ट्री हाउस के नाम से भी जाना जाता है.हम अपने यहां आने वाले पर्यटकों को वाइल्ड लाइफ के अलावा यहां के बुंदेलखंडी कल्चर से भी परिचित कराते हैं. और सबसे खास इस पार्क में यह है कि दुनिया में पाए जाने वाले कुल 8 प्रजाती के वल्चरों (गिद्दों) में से 7 यहां पाए जाते हैं. इसके अलावा नाइट साफारी, जिसमें पर्यटकों को नेशनल पार्क के पास ही झिन्ना नाम की जगह में ले जाकर टैंट में ही लाइट स्टे कराते हैं. इस दौरान हमारी यहा कोशिश रहती है कि लोकल व्यंजनों के स्वाद से उन्हें जरूर परिचित कराएं. लौज में पर्यटकों के लिए एक मल्टीकुसीन रेस्त्रा के अलावा 6 ग्रामीण शैली में बनी हुई वातानुकूलित हट्स हैं. इसके अलावा कैन बोटिंग, फिशिंग के अलावा हर उस सुविधा का खयाल रखा जाता है जिससे आने वाला पर्यटक इस जगह को हमेशा याद रखे.

पन्ना नेशनल पार्क के अलावा यहां निकलने वाले हीरों के लिए भी प्रसिद्ध है. पार्क से थोड़ी ही से थोड़ी ही दूरी पर एनएमडीसी की मझगंवा डायमंड माइंस है जहां हीरो की खुदाई से लेकर उसकी अन्य सफाई प्रक्रिया देखी जा सकती है. अगर समय मिले तो रिजोर्ट से 8 किमी की दूरी पर पन्ना नगर है जिसके युरोपीय शैली में बने मंदिर जरूर देखें. इसके अलावा पार्क से होकर गुजरने वाली केन नदी पार्क की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है. यहां नाव में बैठकर जंगली जीवों को करीब से देखने का आनंद ही कुछ होता है. केन नदी को घड़ियाल अभयारण्य भी घोषित किया हुआ है. पार्क के मुख्य आकर्षणों में एक आकर्षण खूबसूरत पांडव फौल है, जोकि झील में गिरता है. मानसून के दिनों में इस झरने का विहंगम दृश्य बड़ा ही रोमांचकारी लगता हैं. कला के पारखियों के लिए काम और वास्तुकला के अदभुत मेल वाली पाषाण प्रतिमाओं के लिए प्रसिद्ध विश्वप्रसिद्ध खजुराहो यहां से 66 किमी की दूरी पर है. खजुराहो के मंदिर भारतीय कला शिल्प की नायाब धरोहर है. खजुराहो मंदिरों को 950 - 1050 ई. के बीच मध्‍य भारत पर शासन करने वाले चंदेल वंश के शासकों के द्वारा निर्मित करवाया गया था. खजुराहों में कुल 85 मंदिरों को बनवाया गया था, जिनमें से आज केवल 22 ही बचे है। पूरी दुनिया का ध्‍यान यहां के मंदिरों में स्थित मूर्तियों ने आकर्षित किया है जो कामुकता से भरी हुई है. इस मंदिर को 1986 में यूनेस्को द्वारा विश्‍व विरासत स्‍थल घोषित कर दिया गया था. खजुराहो के पास ही अंग्रेजों के समय में बनाया गया गंगऊ डैम स्थित है इस डैम की वास्तुकला और इंजीनियरिंग देखने लायक है. पास ही रनेह फौल है जिसका वास्तविक रूप मानसून में ही देखने लायक होता है. अगर सही मायने में आपको अपनी यात्रा रोमांचकारी और यादगार बनानी हो तो पन्ना नेशनल पार्क की जंगल साफारी का मजा जरूर लें.

बाजीराव मस्तानी की यादों को समेटे धुबेला

बुंदेलखंड के महाराजा छत्रशाल की बेटी मस्तानी का जन्म और बचपन धुबेला के महलों में बीता. निर्देशक संजयलीला भंसाली भी मस्तानी को लेकर बाजीराव मस्तानी फिल्म बना चुके हैं.यहां मौजूद महलों के अवशेष और छत्रशाल का मुकबरा आज भी यह याद दिलाने के लिए काफी हैं कि उस वक्त का इतिहास क्या होगा. धुबेला खजुराहो से झांसी मार्ग पर स्थित है.

क्या है खास

धुबेला चारों तरफ से खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इन्ही पहाड़ियों के बीच में बड़ी झील के किनारे बना लाल रंग की हट्स और हरेभरे गार्डन वाला धुबेला रिजोर्ट dhubelaresort2012@gmail.com दूर से ही सबको आकर्षित करता है. झांसी खजुराहो साष्ट्रीय राज मार्ग 75 पर स्थित इस रिजोर्ट में मल्टीकुसीन रेस्त्रा के साथ, लक्जरी रूम्स,स्वीमिंग पूल की सुविधाएं उपलब्ध हैं.

रिजोर्ट से धुबेला संग्रहालय मात्र 5 मिनिट की दूरी स्थित है. संग्रहालय एक पुराने किले के अंदर स्थित है. इसमें प्राचीन और आधुनिक युग की कलाकृतियां और अवशेषों का एक समृद्ध कलेक्शन है यहां मुख्य रूप से खजुराहो के प्रसिद्ध बुंदेला वंश के इतिहास, उत्थान और पतन को दर्शाया गया है. अनेक मूर्तियों और कलाकृतियों का समृद्ध और बेहतरीन कलेक्शन बुंदेला राजाओं की जीवनशैली और संस्कृति को समझने में मदद करता हैं. इस संग्रहालय में रखी हुई मूर्तियां शक्ति पंथ से है। यहां बुंदेला शासकों के हथियारों, पोशाकों और चित्रों का एक अनूठा कलेक्शन है. यात्रा के लिए यह संग्रहालय एक एक दिलचस्प जगह है.अब तो राज्य सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए धुबेला महोत्सव शुरू कर दिया है जिसमें लोकनृत्यों के अलावा कई सांस्कृतिक कार्यकृम शामिल होते हैं. अगर खजुराहो जा रहे हैं तो यहां जरूर आना चाहिए. यहां आने पर बुंदेला वंश के शासकों की अद्भुत सांस्कृतिक वृद्धि के बारे में जान सकते हैं. शासकों की भव्य जीवनशैली और उनके विभिन्न कार्यों को धुबेला संग्रहालय में दर्शाया गया है.

- दीपानारायण तिवारी

Publish Sarita Magazine




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