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सरांगकोट सूर्योदय अनुभव : पोखरा से अन्नपूर्णा पर्वतमाला का स्वर्णिम दृश्य

  • Writer: Deep Tiwari
    Deep Tiwari
  • Dec 10, 2025
  • 2 min read

नेपाल का रमणीय नगर पोखरा मानो प्रकृति की गोद में सुसज्जित एक शांतिमय स्वप्न हो। यहाँ की निर्मल झीलें, मंद समीर और पर्वतों की विराटता किसी भी यात्री के मन को क्षणभर में शांत कर देती है। किंतु पोखरा की वास्तविक मोहकता तब प्रकट होती है, जब आप सरांगकोट की ऊँचाइयों से अन्नपूर्णा पर्वतमाला को उदीयमान सूर्य की सुनहरी किरणों में नहाते हुए निहारते हैं।

स्वर्णिम प्रभात और अन्नपूर्णा का दिव्य रूप

सरांगकोट की शिखररेखा पर खड़े होकर जैसे ही प्रथम रश्मियाँ अन्नपूर्णा की हिमाच्छादित चोटियों को स्पर्श करती हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति ने अपना सर्वश्रेष्ठ सौंदर्य उस क्षण के लिए संजोकर रखा हो।

पहाड़ों का रंग धीरे-धीरे बदलता है—गाढ़े नीले से हल्के पीले तक,और फिर चमकदार सुनहरे से देवत्व से परिपूर्ण उजास तक।

उस पल वायुमंडल भी मानो शांत हो जाता है; पंछियों के मधुर कलरव और घाटियों की नीरवता मिलकर एक अदृश्य संगीत-सा रच देते हैं। यह दृश्य केवल आँखों से नहीं, हृदय की गहराइयों तक उतर जाता है।

पोखरा का अलौकिक सौंदर्य

पोखरा एक नगर होने के साथ-साथ एक अहसास भी है—

  • फेवा झील में पर्वतमाला का प्रतिबिंब

  • रंग-बिरंगी नौकाओं की कतार

  • तैरती हुई धुंध की नर्म परत

  • और क्षितिज से झाँकता उगता हुआ सूर्य

इन सबके बीच बैठकर यह आभास होता है कि समय कुछ क्षणों के लिए थम गया है।

सरांगकोट : सूर्योदय का अद्वितीय आकर्षण

सूर्योदय देखने के लिए अनेक यात्री यहाँ पहुँचते हैं, परंतु जैसे ही सूर्य अपनी आभा फैलाना आरंभ करता है, वातावरण में एक अद्भुत निस्तब्धता छा जाती है।

हर व्यक्ति केवल उस दृश्य में डूब जाता है—क्योंकि प्रकृति के ऐसे अद्वितीय रूप के सामने शब्द क्षीण पड़ जाते हैं और मन विस्तृत हो उठता है।

सरांगकोट केवल एक दृष्य-बिंदु नहीं, बल्कि आत्म-अवलोकन का स्थल है। यहाँ पहुँचकर महसूस होता है कि संसार कितना विशाल है और हम उसमें एक साधारण यात्री।

दार्शनिक अनुभूति

स्वर्णिम अन्नपूर्णा यह संदेश देती है—“हर अंधकार के पश्चात प्रकाश अवश्य आता है, और हर कठोरता के पीछे एक नई आशा छिपी होती है।”

इन हिमाच्छादित चोटियों की रोशनी हमें स्मरण कराती है कि जीवन की ऊँचाइयाँ धैर्य, समय और निरंतरता की मांग करती हैं।

यात्रा का समापन, पर अनुभूति का नहीं

जब सरांगकोट से नीचे उतरते हुए पोखरा की शांत झीलें और सुशील वातावरण आपका स्वागत करते हैं, तो मन सहज ही कह उठता है—“कुछ स्थान केवल देखे नहीं जाते… अनुभव किए जाते हैं।”

पोखरा और सरांगकोट उन्हीं अद्वितीय स्थलों में से हैं—जहाँ प्रकृति स्वयं आपके मन में धीरे से फुसफुसाती है—“पुनः अवश्य आना…”

 
 
 

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