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ऋषिकेश : एकआध्यात्मिक यात्रा

  • Writer: Deep Tiwari
    Deep Tiwari
  • Aug 17, 2024
  • 3 min read

ऋषिकेश, हिमालय की तलहटी में स्थित एक आध्यात्मिक स्वर्ग है, जहां गंगा की पवित्र धारा बहती है और यह दुनिया भर के साधकों को आकर्षित करता है। जो आज की आपाधापी वाली जिंदगी से उकता कर शांती की तलाश कर रहे हैं। यह जगहआत्म-खोज और नवीनीकरण का आदर्श स्थान है।

ऋषिकेश का नाम भगवान विष्णु के नाम पर पड़ा है और यह ऋषियों और मनीषियों की किंवदंतियों से भरा हुआ है। यह केवल एक जगह नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आश्रय स्थल है जहां आत्मा को शांति मिलती है। योग की विश्व प्रसिद्ध राजधानी के रूप में, ऋषिकेश परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है। यहाँ हर साल लाखों लोग मोक्ष या आध्यात्मिक मुक्ति की खोज में आते हैं।

इस शांतिपूर्ण स्वर्ग में, हवा भक्ति की सुगंध से भरी हुई है, और साधकों के पदचिह्न भूमि को पवित्र बनाते हैं। यहाँ प्राचीन आयुर्वेद और वैदिक प्रथाओं के बीच, आपका मन शांति पा सकता है, आपका शरीर उपचार प्राप्त कर सकता है, और आपकी आत्मा ज्ञान प्राप्त कर सकती है। तपोवन के सख्त शाकाहारी सिद्धांतों से लेकर ध्यान के पुनरोध्धार अभ्यास तक, ऋषिकेश योगियों, तपस्वियों और थके हुए यात्रियों के लिए एक शरण प्रदान करता है।

मेरी यात्रा

योगनगरी में मेरा प्रवास बद्रीविशाल के दर्शनों के बाद हुआ। 4 दिन की स्वर्गिक यात्रा करने के बाद 1 दिन का ऋषिकेश प्रवाह मानस पटल पर कई स्मृतियां सजो गया।

त्रिवेणी घाट - मेरा प्रवास परमार्थ गंगा घाट से 50 मीटर की दूरी पर ही स्थित था शाम को जैसे ही गीता आश्रम और परमार्थ आश्रम की घंटियों की आवाज काम में सुनाई दी शरीर गंगा घाट पर जाने को चैतन्य हो गया।

त्रिवेणी घाट अपनी गहरी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जड़ों के लिए प्रसिद्ध है। इसका उल्लेख विभिन्न प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रों में मिलता है, जो हिंदू परंपरा में इसके महत्व को दर्शाते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण एक शिकारी के तीर से घायल होने के बाद त्रिवेणी घाट पर आए थे। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने खुद को ठीक करने के लिए नदियों के संगम में स्नान किया था।

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने त्रिवेणी घाट पर समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पी लिया था। उनका गला नीला हो गया, जिससे उन्हें नीलकंठ नाम मिला, जिसका अर्थ है 'नीले गले वाला।' भगवान शिव के इस आत्म-बलिदान को भक्तगण याद करते हैं और घाट पर आकर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं तथा उनका आशीर्वाद लेते हैं।

यह ऐतिहासिक संगम न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का स्थल है, बल्कि एक ऐसा स्थान भी है जहां महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान और समारोह आयोजित किए जाते हैं, जो इसे ऋषिकेश के सांस्कृतिक ताने-बाने का एक अनिवार्य हिस्सा बनाता है।

ऋषिकेश परमार्थ निकेतन की गंगा आरती: एक दिव्य अनुभव

परिचय: ऋषिकेश, जिसे योग और ध्यान की राजधानी के रूप में जाना जाता है, अपनी पवित्र गंगा आरती के लिए भी प्रसिद्ध है। इन आरतियों में एक विशेष स्थान परमार्थ निकेतन का है, जो गंगा के किनारे स्थित एक प्रमुख आश्रम है। यहां की गंगा आरती न केवल धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करती है।

परमार्थ निकेतन:

परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के प्रमुख आश्रमों में से एक है, जो गंगा के किनारे स्थित है। इस आश्रम की स्थापना स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने की थी और यह भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सक्रिय है। परमार्थ निकेतन का मुख्य उद्देश्य ध्यान, योग, और सेवा के माध्यम से जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करना है।

गंगा आरती का महत्व: गंगा आरती, जो शाम को होती है, परमार्थ निकेतन का मुख्य आकर्षण है। यह अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह एक दृश्य और ध्वनि का अद्भुत संयोग भी है। गंगा की पवित्रता को मान्यता देते हुए, यह आरती श्रद्धा और भक्ति का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करती है।








Parmarh Niketan Ganga Ghat at night



 
 
 

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