वनराज की मांद में सनसेट का आनंद
- Deep Tiwari

- May 15, 2022
- 4 min read
बुंदेला राजा छत्रशाल की कभी राजधानी रही और अब चारों धाम के मंदिर को अपने नगर में स्थान देने वाली पद्मावति की नगरी यानि पन्ना से हममे अपनी 350 सीसी क्लासिक इनफील्ड पर बैठ कर अनुमति ले ली थी और रास्ते में प्रकृति के नजारों को अपनी आंखों में बसाने की चाहत से धुक-धुक की कोमल आवाज के साथ अपनी मंजिल की और निकल पड़े थे।
जहां हमारा अगला पढ़ाव पन्ना नेशनल पार्क था.
बाघ देखने के शौकीन पर्यटकों के लिए पन्ना नैशनल पार्क सब से अच्छी जगह है. छतरपुर और पन्ना जिलों में फैला यह नैशनल पार्क 5 साल पहले उस समय काफी चर्चा में रहा जब यह बाघविहीन हो गया था. पर लोगों की जागरूकता और प्रशासन के संयोग से आज जंगल फिर बाघ की दहाड़ से गूंजने लगा है. 543 स्क्वायर किलोमीटर में फैले इस पार्क में 32 से भी ज्यादा वनराज शान से चहलकदमी करते दिखाई देंगे.
केन नदी के बीच टापू में बैठकर लजीज लंच का लुत्फ
केन नदी के किनारे का सुरम्य वातावरण और पेड़ के ऊपर बने मचाननुमा रैस्टोरैंट में बैठ कर पहाडि़यों के पीछे डूबते सूरज के मनोरम दृश्य को देखने के साथ गरमागरम कौफी के घूंट का एहसास आप को किसी दूसरी ही दुनिया में ले जाता है. नैशनल पार्क के मंडला गेट से थोड़ी ही दूरी पर स्थित केन नदी के मुहाने पर बना केन रिवर लौज शाही मेहमान- नवाजी के लिए जाना जाता है.लौज के मालिक श्यामेंद्र सिंह उर्फ बिन्नी राजा बताते हैं, ‘‘हमारा केन रिवर लौज सब से पुराना है. यह ट्री हाउस के नाम से भी जाना जाता है. हम अपने यहां आने वाले पर्यटकों को वाइल्डलाइफ के अलावा यहां के बुंदेलखंडी कल्चर से भी परिचित कराते हैं और सब से खास इस पार्क में यह है कि दुनिया में पाए जाने वाले कुल 8 प्रजाति के वल्चरों यानी गिद्दों में से 7 यहां पाए जाते हैं. इस के अलावा पर्यटकों को नैशनल पार्क के पास ही झिन्ना नाम की जगह में ले जा कर टैंट में ही नाइट स्टे कराते हैं. इस दौरान हमारी यहां कोशिश रहती है कि लोकल व्यंजनों के स्वाद से उन्हें जरूर परिचित कराएं. लौज में पर्यटकों के लिए एक मल्टीकुजीन रेस्तरां के अलावा 6 ग्रामीणशैली में बनी हुई वातानुकूलित हट्स हैं. इस के साथ कैन बोटिंग, फिशिंग के अलावा हर उस सुविधा का खयाल रखा जाता है जिस से आने वाला पर्यटक इस जगह को हमेशा याद रखे.’’
नजारों को नजरों से न जाने दें
पन्ना नैशनल पार्क को और भी करीब से जानना है तो इन रिजौर्ट्स से ही टैक्सी बुक करें और अन्य जगहों का करीब से मजा ले सकते हैं. 1980 के पहले इसे वाइल्डलाइफ सैंचुरी घोषित किया गया था. 1981 में इसे नैशनल पार्क का दरजा दिया गया. पन्ना नैशनल पार्क आने के लिए नवबंर से अप्रैल माह के बीच का समय उपयुक्त होता है. पार्क में टाइगर के अलावा चौसिंगा हिरण, चिंकारा, सांभर, जंगली बिल्ली, घडि़याल, मगरमच्छ, नीलगाय से भी रूबरू हुआ जा सकता है. सब से नजदीक यहां से खजुराहो है जहां रेलमार्ग और हवाईमार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है. अब तो रेलवे ने भी अपनी लक्जरी ट्रैन महाराजा का रूट खजुराहो से हो कर वाराणसी कर दिया है. खजुराहो से 30 मिनट में पन्ना नैशनल पार्क पहुंचा जा सकता है.
पन्ना की तमन्ना है कि हीरा मुझे मिल जाए
पन्ना नैशनल पार्क के अलावा हीरों के लिए भी प्रसिद्ध है. पार्क से थोड़ी ही दूरी पर एनएमडीसी की मझगंवा डायमंड माइंस है, जहां हीरों की खुदाई से ले कर उन की अन्य सफाई प्रक्रिया देखी जा सकती है. अगर समय मिले तो रिजर्ट से 8 किलोमीटर की दूरी पर पन्ना नगर है जिस के यूरोपीय शैली में बने मंदिर जरूर देखें. पार्क से हो कर गुजरने वाली केन नदी पार्क की खूबसूरती में चारचांद लगाती है. यहां नाव में बैठ कर जंगली जीवों को करीब से देखने का आनंद ही कुछ अलग होता है. केन नदी को घडि़याल अभयारण्य भी घोषित किया हुआ है. पार्क के मुख्य आकर्षणों में एक आकर्षण खूबसूरत पांडव फौल है जो झील में गिरता है. मानसून के दिनों में इस झरने का विहंगम दृश्य बड़ा ही रोमांचकारी लगता हैं.
और भी हैं घुमंतूओं के लिए ठिकाने
कला के पारखियों के लिए काम और वास्तुकला के अद्भुत मेल वाली पाषाण प्रतिमाओं के लिए विश्वप्रसिद्ध खजुराहो यहां से 66 किलोमीटर की दूरी पर है. खजुराहो के मंदिर भारतीय कला शिल्प की नायाब धरोहर हैं. खजुराहो मंदिरों को 950-1050 ई. के बीच मध्य भारत पर शासन करने वाले चंदेल वंश के शासकों के द्वारा निर्मित करवाया गया था. खजुराहों में कुल 85 मंदिरों को बनवाया गया था, जिन में से आज केवल 22 ही बचे हैं. पूरी दुनिया का ध्यान यहां के मंदिरों में स्थित मूर्तियों ने आकर्षित किया है जो कामुकता से भरी हुई हैं. मंदिर को 1986 में यूनैस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया. खजुराहो के पास ही अंगरेजों के समय में बनाया गया गंगऊ डैम स्थित है. इस डैम की वास्तुकला और इंजीनियरिंग देखने लायक है. पास ही रनेह फौल है जिस का वास्तविक रूप मानसून में ही देखने लायक होता है. अगर सही माने में आप को अपनी यात्रा रोमांचकारी और यादगार बनानी है तो पन्ना नैशनल पार्क की जंगल सफारी का मजा जरूर लें.







- Deep Narayan Tiwari









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