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प्रकृति के झरोखों से बुंदेली वास्तुकला की झलक - राजगढ़ पैलेस

  • Writer: Deep Tiwari
    Deep Tiwari
  • May 19, 2022
  • 2 min read

हमारे यहां बुंदेलखंडी में एक कहावत बहुत प्रचलित हैं " कि पढ़ने से ज्यादा अक्ल कड़ने ( बाहर घूमने ) से आती है.

और यह सच भी है क्योंकि लोग कहते हैं कि किताबें पढ़ने से ज्यादा ज्ञान यात्रायें करने से आता है।

किताबें हमें दर्पण की तरह आभास कराती है मगर यात्रायें हमें वास्तविक अनुभव कराती है। यात्रायें आपकी पाठशाला भी होती है और एक ऐसी दोस्त भी जो आपकी हर सुख दुःख को इत्मीनान से सुनती हैं।

मैं देश के ह्रदय में स्थित मध्यप्रदेश के एक छोटे से कस्बे का निवासी हूं। मेरा कस्बा था तो छोटा लेकिन शान ओ -शौकत ,आन.बान और शान में सूर्य की तरह दमकता रहता। बचपन से ही प्रकृति के काफी करीब रहा हूं, कारण पापा को बागवानी का शौक था जिस कारण न चाहते हुए भी पेड़-पोधों से दिल लगाना पड़ा। मेरा घर भी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बुंदेलखंड में था जहां चारों ओर से सघन सागौन के जंगलों का जमावड़ा था।

पिछलों दिनों जब देश की राजधानी के कंक्रीट के जंगलों से निकलकर अपने घर पहुंचा तो आनन फानन में मित्र मंडली ने अगले दिन का कार्यक्रम बना डाला। सुबह सोकर उठा तो देखा उजाला पसरता जा रहा है सूरज की अरूणिमा आसपास के पेड़ों पर एक अलग ही तरह की खुबसूरती बिखेर रही थी।

जानें का कार्यक्रम तय हो चुका था कि कौन क्या करेगा , कौन किसके साथ बाइक की सीट पर पीछे मस्ती करेगा, सबके पेट पूजा का इंतजाम कौन करेगा।

राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 76 जो कि मेरे कस्बे से ही निकलता है चल पड़े सभी सभी एक अलग जगह पर जो अभी तक लोगों काी पहुंच से दूर थी।

जैसे ही छतरपुर शहर बायपास से आगे निकले बमीठा और कई छोटे-छोटे से गांव को पीछे छोड़कर हम सिर्फ आगे ही बढ़ते जा रहे थे कि तभी चंद्रनगर का बोर्ड देखकर सभी के की बाइक के टायर ठिठक गए।

जैसे ही राजगढ़ गांव जाने वाली सड़क पर आगे चले तो सामने ही प्रवेश करते ही नजर आने वाला एक विशाल किले नुमा भवन जिसे राजगढ़ पैलेस के नाम से जाना जाता है नजर आने लगा । यह पैलेस आने जाने वाले सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है इसकी बुंदेली वास्तुकला और प्रकृति की ओर से किया गया श्रंगार सभी काो आकर्षित करता है। वर्तमान में यह ओबेराय होटल ग्रुप के द्वारा लीज पर ले लिया गाया है और इसे वह वेडिंग जेस्टीनेशन के रूप में डेवलप कर रहे हैं

इसके पीछे केन नदी पर बने गंगऊ डेम से आने वाली नहर निकली है और यह पैलेस एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है । प कुल मिलाकर पूरे दिन की ट्रिप और केन नदी के पास बने ढाबे से पेट की आग शांत करने के बाद हम सभी अपने दिलों में गुदगुदी यादों को समेटे अपने आशियाने की ओर लौट चले......

- दीप तिवारी


 
 
 

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