भागीरथी से मां गंगा तक: एक दिव्य प्रवाह की यात्रा
- Deep Tiwari

- Aug 3, 2024
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गंगोत्री से भागीरथी का उद्गम
गंगा की पवित्र यात्रा की शुरुआत गंगोत्री ग्लेशियर से होती है, जो हिमालय की उचाई पर स्थित है। यहाँ से भागीरथी नदी का उद्गम होता है, एक शीतल और स्वच्छ धारा जो हिमालय के ऊँचाईयों से निकलती है। इस बर्फीले ग्लेशियर के निचले हिस्से से बहती भागीरथी धीरे-धीरे एक नदी के रूप में आकार लेती है, और इसके पास के क्षेत्रों में जीवन की नयी ऊर्जा का संचार करती है।
देवप्रयाग का संगम: भागीरथी और अलकनंदा
भागीरथी की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव देवप्रयाग है, जहां यह अलकनंदा के साथ संगम करती है। देवप्रयाग एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ पर अलकनंदा और भागीरथी का मिलन होता है। अलकनंदा, जो स्वयं पाँच नदियों के संगम से अपनी ताकत प्राप्त करती है—धौलीगंगा, नंदनगंगा, पिंडारी, कर्नाली और काली गंगा—यहाँ पहुँचकर अपने जल की शक्ति को और भी बढ़ा देती है। इस संगम से भागीरथी की निर्मल जलधारा का संयोग होता है, और यह मिलन एक दिव्य अनुभव प्रस्तुत करता है।
ऋषिकेश का अद्भुत दृश्य








हरिद्वार: हर की पौड़ी की ओर यात्रा
ऋषिकेश से आगे बढ़ते हुए, भागीरथी की धारा हरिद्वार पहुंचती है, जहां यह हर की पौड़ी से गुजरती है। हरिद्वार एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है और यहाँ गंगा की जलधारा का स्वागत भव्य ढंग से किया जाता है। हर की पौड़ी पर गंगा आरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक और भव्य होता है। यहाँ पर आस्था और श्रद्धा के अनगिनत प्रमाण होते हैं, जहाँ भक्तगण गंगा के पवित्र जल में स्नान करके अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने की आशा करते हैं।
समापन
भागीरथी से लेकर मां गंगा तक की यह यात्रा केवल एक नदी का सफर नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति की एक दिव्य यात्रा है। गंगोत्री से शुरू होकर देवप्रयाग, ऋषिकेश और हरिद्वार तक की यात्रा हमें भारतीय संस्कृति, धार्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य की अद्भुत झलक प्रदान करती है। गंगा नदी का यह सफर एक अविरल प्रवाह की कहानी है, जो भारतीय सभ्यता के दिल में सदा जीवित रहेगा।
दीप तिवारी









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